पदोन्नति में आरक्षण के मामले में संविधान बेंच फैसला करेगी, अगस्त के फर्स्ट वीक में होगी सुनवाई

नई दिल्ली. सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के अपने फैसले को लेकर अंतरिम आदेश देने से बुधवार को मना कर दिया, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई 7 जजों की संविधान बेंच में होगी। अगस्त के फर्स्ट वीक में सुनवाई हो सकती है। पदोन्नति में आरक्षण को लेकर संविधान बेंच में कई यचिकायें लंबित है। केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि संविधान बेंच जल्द सुनवाई करें, क्योंकि रेलवे सहित सरकारी सेवाओं में लाखों लोगों के प्रमोशन रूके हुए हे। गर्मी की छुट्टियों में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को एससी -एसटी के लोगों को पदोन्नति में आरक्षण देने की अनुमति दी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार कानून के हिसाब से आगे बढ़े।
40 हजार से अधिक बिना पदोन्नति पाये ही हो गये रिटायर्ड
30 अप्रैल 2016 में जबलपुर हाईकोर्ट ने पदोन्नति के नियम को अवैधानिक करार दे दिया, इसी के आधार पर गलत पदोन्नति अनुसूचित जाति/जनजाति के शासकीय कर्मचारियों को रिवर्ट करने का फैसला हुआ। इसके विरोध में ही मप्र सरकार सुप्रीम कोर्ट गयी। प्रकरण में वर्तमान में यथास्थिति बनाये रखने के आदेश हैं लिहाजा अप्रैल 2018 तक यानी दो वर्ष से प्रमोशन बन्द हैं । अभी तक 40 हजार से अधिक कर्मचारी अधिकारी बिना प्रमोशन पाये ही रिटायर्ड हो चुके हैं।
एक करोड़ हस्ताक्षर कराएगा सपाक्स

प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रहा सपाक्स संगठन 14 जुलाई से हस्ताक्षर अभियान चलाएगा। सभी जिलों से एक करोड़ हस्ताक्षर कराकर राष्ट्रपति को भेजे जाएंगे। सपाक्स इसकी भी तैयारी कर रहा है कि संविधान बेंच के सामने अपना पक्ष रख सके।
एमपी में 2002 बनाया प्रावधान ही यथावत रहे-पुष्पेन्द्र कौरव, मप्र महाधिवक्ता
संविधान बेंच में सुनवाई के लिये हम अपनी तैयारी कर रहे हैं हम चाहते हैं कि एमपी 2002 में बनाये गये प्रावधान ही यथावत रहें, लेकिन बीच में एम नागराज मामले में फैसला आ चुका है। अब निर्णय 7 जजों की संविधान बेंच को लेना है । जहां तक कैबिनेट सब कमेटी द्वारा बनाये जा रहे नियम ‘‘पदोन्नति में आरक्षण’’ की पॉलिसी का सवाल है तो अब फिलहाल इसका कोई मतलब नहीं है। संविधान बेंच के फैसले पर सब निर्भर है। उम्मीद है कि पहली सुनवाई के बाद एक सप्ताह के अन्दर कोई निर्णय हो जायेगा।
पिछड़ापन है या नहीं, यह देखना जरूरी- संविधान बेंच

15 नवंबर को शीर्ष कोर्ट की 5 जजों की संविधान बेंच ने कहा था कि प्रमोशन में आरक्षण से पहले देखना होगा कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और पिछड़ापन है या नहीं। कोर्ट ने कहा था कि अजाध्अजजा के केस में क्रीमीलेयर का कान्सेप्ट लागू नहीं होता।

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