वीरांगना लक्ष्मीबाई के साहस का साक्षी है ग्वालियर का किला

ग्वालियर. मप्र के ग्वालियर में स्थित देश के प्रसिद्ध किलों में एक ग्वालियर किले का निर्माण 8वीं शताब्दी में किया गया था, यह किला मध्यकालीन स्थापत्य कला के अद्भुत नमूनों में से एक है। यह किला ग्वालियर शहर का प्रमुख किला हैै जो गोपांचल नाम छोटी पहाड़ी पर स्थित हैं लाल बलुए पत्थर से निर्मित यह किला देश के सबसे बड़े किलों में से एक हैं।
1023 ईसवीं में महमेद गजनवी आक्रमण किया था
इतिहास के आंकड़ों की मानें तो इस किले का निर्माण सन् 727 ईसवी में सूर्यसेन ने करवाया था। इस किले पर कई राजपूत राजाओं ने राज किया है किले की स्थापना के बाद लगभग 989 वर्षो तक इस पर पाल वंश ने राज किया और इसके बाद इस पर प्रतिहार बंश ने राज किया। 1023ईसवी में महमूद गजनवी ने गोपांचल स्थित ग्वालियर किले पर आक्रमण किया था लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा था।

मराठों ने लहराया था परचम
1196 ईसवीं में लम्बे घेराबन्दी के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने इस किले को अपने अधीन किया था लेकिन 1211 ईसवीं में उसे हार का सामना करना पड़ा फिर 1231 ईसवीं में गुलामवंश के संस्थापक ने इसे अपने अधीन किया और बाद महाराजा देववरम् ने ग्वालियर पर तोमर राज्य की स्थापना की और इस वंश के लिये सबसे प्रसिद्ध राजा थे मानसिंह (1486-1516) में जिन्होंने अपनी पत्नी मृगनयनी के लिये गूजरी महल बनाया था 1398 से 1505ईसवी तक इस किले पर तोमर वंश का राज रहा हैं, मुगलवंश के बाद इस पर राणा और जाटों का राज रहा फिर इस पर मराठों ने अपनी पताका फहराई।
ग्वालियर किले में हैं यह स्मारक

किला में कई ऐतिहासिक स्मारक, बुद्ध और जैन मंदिर, महल ;गूजरी महल, मानसिंह महल, जहांगीर महल, कर्ण महल, शाहजहां महलद्ध मौजूद हैं । किला मुख्यतः 2 भाग में बंटा है। मुख्य किला और महल ;गूजरी महल, और मानमंदिर महल। इन किलों का निर्माण राजा मान सिंह ने करवाया था। गूजरी महल, का निर्माण उन्होंने अपनी प्रिय रानी मृगनयनी के लिए करवाया था, अब गुजारी महल को पुरातात्विक संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है। इस संग्रहालय में दुर्लभ मूर्तियां रखी गई हैं जो पहली ईस्वी की हैं। ये मूर्तियां यहीं के आसपास के इलाकों से प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा आप यहां तेली का मंदि, 10वीं सदी में बना सहस्त्रबाहु मंदिर, भीम सिंह की छतरी और सिंधिया स्कूल देख सकते हैं।

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