थाईलैण्ड की गुफा से 17 बाद सुरक्षित बाहर निकाले 13 फुटबॉल खिलाडी, सबसे छोटा बच्चा और कोच को अंतिम दिन बचाया गया

बैंकॉक. थाईलैण्ड की थाम लुआंग गुफा में फंसी फुटबॉल टीम के सभी सदस्यों को 17 दिन बाद मंगलवार की शाम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। यह चमत्कार थाईलैण्ड में हुआ है। इस खबर से दुनिया के हर देश में ऐसी खुशी जै जैसे वर्ल्ड कप जीत लिया हो उससे लगता है कि दुनिया में इंसानियत आज भी जिन्दा है। यह धैर्य, साहस और प्रेरणा से भरी हुई एक शुभ खबर है। यहां पर आपको बता दें कि इस खबर को इंटरनेट पर पूरी दुनिया में सबसे अधिक सर्च की जाने वाली खबर है। इसे पिछले 24 घंटों में करोड़ों लोग सर्च कर चुके हैं।
फायनल रेस्क्यू ऑपरेशन 8 जुलाई को शुरू हुआ
8 जुलाई को फाइनल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, जो 10 जुलाई को खत्म हुआ। आखिरी दिन कोच इकापोल चांटावांग (25)  सहित टीम के 5 सदस्यों को बाहर निकाला गया। 23 जून को गुफा देखने गई टीम बाढ़ की वजह से उसमें फंस गई थी। 9 दिन बाद 2 ब्रिटिश गोताखोरों ने गुफा में फंसे बच्चों को सबसे पहले खोजा था। इस घटना का वीडियो सामने आया था। मुश्किल हालात में भी इतने दिन तक संघर्ष करने वाले टीम के सदस्यों को ब्रिलियंट 13 का नाम दिया गया।इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में थाई नेवी शील गोताखोरों ने बड़ी भूमिका अदा की है और इसका असर उसके फेसबुक पेज पर भी दिखाई दे रहा है। इस पेज को 17 लाख से भी अधिक लोगों ने फोलो किया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन
रेस्क्यू ऑपरेशन के आखिरी दिन 11वां बच्चा चैनिन विबूरॉन्गैंग बाहर आया और वह जूनियर फुटबॉल टीम का सबसे छोटा साथी है। टीम के सभी सदस्य उसे टाइटन के नाम से बुलाते हैं उसने 5 वर्ष पूर्व फुटबॉल खेलना शुरू किया था। रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे नेवी अधिकारियों ने अपने फेसबुक पेज पर क पोस्ट डाली है। इसमें उन्होंने लिखा है कि हमें नहीं पता यह चमत्कार है, विज्ञान है या कुछ ओर । फिलहाल 13 वाइल्ड बोर (फुटबॉल टीम का नाम) गुफा से बाहर आ चुके हैं।
एक बच्चे को निकालने का जिम्मा दो गोताखोरों ने संभाला
एक बच्चे को गुफा से सुरक्षित बाहर निकालने का जिम्मा 2  गोताखोरों ने संभाला, इसमें से एक गोताखोर बच्चे के आगे और एक पीछे था। अगला गोताखोर बच्चे के साथ स्वयं को रस्सी बांध कर उसे सहारा देते हुए तैरता था और उसके हाथ में ही बच्चे का ऑक्सीजन सिलेण्डर होता था, पीछे वाला गोताखोर गुफा में बांधी गयी रस्सी के सहारे बच्चे की मदद करते हुए तैर रहा था हर बच्चे और कोच को फुल मास्क और वेट सूट में बाहर लाया गया ऑपरेेशन को केव मेज -बॉटलनेेक नाम दिया गया था।
गुफा से 3.2 किलोमीटर दूर फंसे थे बच्चे
गुफा के मुख्य निकास से बच्चों के फंसे होने की जगह 3.2 किलोमीटर दूर थी। इसमें कुछ हिस्सों में पानी था। अंधेरे की वजह से इसमें देख पाना भी मुश्किल था। इसके अलावा संकरे रास्ते अभियान में बड़ी रुकावट थे। थाईलैंड के अलावा अमेरिका, चीन, जापान, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के 90 गोताखोर बचाव कार्य में लगे थे। एक हजार से ज्यादा जवान और एक्सपर्ट इस अभियान में मदद कर रहे थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के हीरो रहें ब्रिटिश गोताखोर
ब्रिटिश गोताखोर जॉन वोलेंनथन और रिक स्टैटन रेस्क्यू ऑपरेशन के हीरों रहें हैं। दोनो ने ही गुफा में फंसे बच्चों को सबसे तलाशा था और यह बच्चे कीचड के बीच बनी एक छोटी सी चट्टान पर बैठे पाये गये, जॉन ने जब उनसे पूछ कि आप कितने लोग हैं तो अन्दर से आवाज आई-13, गोताखोरों ने कहा कि सबसे पहले आने वाले हैं, लेकिन अभी बहुत सारे लोग तुम्हारी मदद के लिये आयेंगे।

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