निर्भया के दुष्कर्मियों की फांसी की सजा बरकार, सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज की

नई दिल्ली. निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 4 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। दोषियों की ओर से दायर की गई पुनर्विचार याचिका कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दी। चार में से तीन दोषियों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और विनय शर्मा ने सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। चौथी दोषी अक्षय कुमार सिंह ने याचिका दायर नहीं की थी।
16 दिसंबर 2012 की रात चलती बस में हुए दुष्कर्म मामले में दोषियों की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को मुहर लगा दी थी। दोषियों ने दक्षिण दिल्ली के एक इलाके में पीडि़ता से दुष्कर्म किया था और उसे बुरी तरह जख्मी करने के बाद सड़क पर फेंक दिया था। सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की 29 दिसंबर 2012 को मौत हो गई थी। तिहाड़ जेल में बंद एक आरोपी राम सिंह ने कथित रूप से 11 मर्च 2013 को आत्महत्या कर ली थी। दुष्कर्मियों में एक नाबालिग भी था। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने दोषी करार दिया था। वह 3 वर्ष की सजा काटकर बाहर आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए फैसले में घटना को नृशंस और क्रूर बताया था। यह भी कहा था कि घटना से सदमे की सुनामी आ सकती है जो सभ्य समाज को ख्त्म कर देगी।
सिस्टम नाकाम हो चुका है
निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि घटना को 6 वर्ष हो चुके हैं लेकिन आज भी आए दिन ऐसी वारदातें हो रही हैं। हमें उम्मीद है कि फैसला हमारे पक्ष में ही आएगा। पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के हो रहे शोषण के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास भी अपील करेंगे।

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